प्रस्तुत आलेख में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन ने कुँवर नारायण की दार्शनिक कविता ‘स्वयं की अभिव्यक्तियाँ’ का एक…
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कृष्ण कल्पित को विवाद का पर्याय माना जाता है। लेकिन क्या यह विवाद एक तंज नहीं जो…
कॉर्पोरेट कार्य-संस्कृति, तकनीक-संचालित निगरानी और संस्थागत दबावों के बीच पिसते आधुनिक मनुष्य के नैतिक द्वंद्व को समझना आज…
कुँवर नारायण के जन्मशती वर्ष के अवसर पर ‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन द्वारा कुँवर नारायण की कविता ‘घर रहेंगे’…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का श्रीकांत वर्मा की कविता ‘कोसल में विचारों…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन द्वारा रघुवीर सहाय की सुप्रसिद्ध कविता ‘आपकी हँसी’ का…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में हम वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का एक विशद, गंभीर और…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन द्वारा रघुवीर सहाय की ‘आत्महत्या के विरुद्ध’…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का ‘धूमिल’ की कालजयी कविता ‘पटकथा’ का पुनर्पाठ प्रकाशित किया जा…
