समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में विमलचन्द्र पाण्डेय की कहानी ‘ऊब महासागर’ हमारे समय के महानगरीय जीवन की उस गहरी आंतरिक…
विधाएँ
रचना समय’ की इस प्रस्तुति में तरुण भटनागर की कहानी ‘ज़ख़्मे-कुहन’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रतिष्ठित रचनाकार और स्त्रीवादी आलोचक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का आलेख “इंटरसेक्शनैलिटी…
रचना समय‘ की इस प्रस्तुति में “वैश्विक चौखट पर पाँच दरवाज़ा : शून्य से सृजन तक” शीर्षक वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर…
“रचना समय” की इस प्रस्तुति में हम प्रबुद्ध पाठकों के लिए वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रोफ़ेसर रवि रंजन का विचारोत्तेजक आलेख—“आभासी दोस्ती के दौर में ‘दोस्त’:…
प्रेमचंद के बाद से आज तक की हिंदी कहानी के संवेदना और स्वरूप से पाठक भलीभांति परिचित…
हिंदी कविता के साठोत्तर दौर में जब अधिकांश आवाज़ें नारों और प्रत्यक्ष विद्रोह में मुखर थीं, तब…
बहादुर पटेल समकालीन कविता के एक ज़रूरी नाम हैं। आपके लिए जो जीवन है ,वही काव्य है।…
भारत में मानसिक स्वास्थ्य को अभी भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि सचाई यह है कि…
