प्रेमचंद के बाद से आज तक की हिंदी कहानी के संवेदना और स्वरूप से पाठक भलीभांति परिचित हैं। कहानी आंदोलन अर्थात् किसी विचारधारा से नहीं वरन् जीवन से जन्म लेती है , वही असल कहानी होती है और सर्वमान्य। यह…
हिंदी कविता के साठोत्तर दौर में जब अधिकांश आवाज़ें नारों और प्रत्यक्ष विद्रोह में मुखर थीं, तब वेणु गोपाल एक अलग, गहरी और शांत लेकिन अत्यंत शक्तिशाली स्वर लेकर आए। उनकी कविता न चीखती है, न नारे लगाती है, फिर…
बहादुर पटेल समकालीन कविता के एक ज़रूरी नाम हैं। आपके लिए जो जीवन है ,वही काव्य है। अर्थात जीवन से दूर काव्य अर्थहीन है। इसलिए आप जीवन के समानांतर नहीं बल्कि जीवन में धँसकर जीवन के विद्रूप का अर्थ देते…
भारत में मानसिक स्वास्थ्य को अभी भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि सचाई यह है कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या एक गंभीर रूप ले चुकी है। उनमें तनाव, अवसाद और चिंता तेजी से बढ़ रही है। एक…
श्रुति कुशवाह की कविता में हमें एक anguish या यों कहें एक व्यथाजनित ग़ुस्सा दीखता है। यह ग़ुस्सा वर्तमान जीवन से उपजा है जो असंगतपूर्ण है, असमानता का पर्याय है श्रुति जिसे विट के जरिये तार – तार करती हैं।…
