‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में हम वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का एक विशद, गंभीर और शोधपूर्ण आलेख “कोलाहल से संसृति तक : कुंवर नारायण की ‘माध्यम’ कविता का सौन्दर्यशास्त्र” प्रकाशित कर रहे हैं। यह आलेख कुंवर नारायण की…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन द्वारा रघुवीर सहाय की ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ कविता का पाठ-विश्लेषण प्रकाशित किया जा रहा है। आलेख में कविता को लोकतंत्र, सत्ता, भाषा और स्मृति के परस्पर संबंधों के काव्यात्मक पाठ के रूप…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का ‘धूमिल’ की कालजयी कविता ‘पटकथा’ का पुनर्पाठ प्रकाशित किया जा रहा है। यह आलेख ‘पटकथा’ को किसी एक सीमित विचारधारात्मक चौखटे में बाँधने के बजाय उसकी बहुस्तरीय व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें रेमंड विलियम्स की ‘अनुभूति की…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का कवि संतोष चतुर्वेदी की प्रसिद्ध ‘दुभाषिए’ कविता के समाजभाषावैज्ञानिक विश्लेषण पर केन्द्रित आलेख प्रकाशित किया जा रहा है, जो समकालीन साहित्यिक विमर्श में एक मूल्यवान हस्तक्षेप है। इसमें…
ब्रज श्रीवास्तव समकालीन कविता के स्वर हैं। आपने अपनी कविताओं के माध्यम से आज के समय की आलोचना की है। इस आलोचना का स्वर रचनात्मक है। आपमें ह्यूमर है ,चिढ़ाने वाला नहीं वरन् गहरे पैथाज़ में डुबाने वाला। रचना समय…
