Press ESC to close

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य की महत्त्वपूर्ण कथाकार सारा राय की चर्चित कहानी ‘अबाबील की उड़ान’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का यह आलेख कहानी के बहुस्तरीय अर्थ-संसार को नई दृष्टि से उद्घाटित करता है। आलेख…

Continue Reading

‘जो डूबा सो पार’ प्रेम, विस्थापन और मानवीय संवेदनाओं की एक अद्भुत कथा है। ज्ञान चतुवेॅदी ने भूत के माध्यम से निस्वार्थ प्रेम को चित्रित किया है जो पाने की नहीं, केवल बने रहने की आकांक्षा रखता है। लोककथा के…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रमुख समकालीन कवयित्री सविता सिंह की बहुचर्चित और विचारोत्तेजक कविता ‘मैं किसकी औरत हूँ’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर रवि रंजन का एक गंभीर, विस्तृत और बहुआयामी आलेख प्रस्तुत है।  हिन्दी कविता में स्त्री-अस्मिता,…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रतिष्ठित रचनाकार और स्त्रीवादी आलोचक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का आलेख “इंटरसेक्शनैलिटी और स्त्री आत्मकथाएँ” दिया जा रहा है, जो स्त्री विमर्श को एक बेहद ज़रूरी और विचारोत्तेजक धरातल प्रदान करता है। यह आलेख पश्चिमी…

Continue Reading

रचना समय‘ की इस प्रस्तुति में “वैश्विक चौखट पर पाँच दरवाज़ा : शून्य से सृजन तक” शीर्षक वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख हिंदी आलोचना की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो कविता को केवल स्थानीय या राष्ट्रीय संदर्भ में नहीं, बल्कि…

Continue Reading