Press ESC to close

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रतिष्ठित रचनाकार और स्त्रीवादी आलोचक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का आलेख “इंटरसेक्शनैलिटी और स्त्री आत्मकथाएँ” दिया जा रहा है, जो स्त्री विमर्श को एक बेहद ज़रूरी और विचारोत्तेजक धरातल प्रदान करता है। यह आलेख पश्चिमी…

Continue Reading

रचना समय‘ की इस प्रस्तुति में “वैश्विक चौखट पर पाँच दरवाज़ा : शून्य से सृजन तक” शीर्षक वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख हिंदी आलोचना की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो कविता को केवल स्थानीय या राष्ट्रीय संदर्भ में नहीं, बल्कि…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का तरुण भटनागर की कथा-संवेदना पर एक अत्यंत गंभीर और सूक्ष्म ‘उत्तर-औपनिवेशिक पाठ’ प्रस्तुत किया जा रहा है । आलेख इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे तरुण…

Continue Reading

“रचना समय” की इस प्रस्तुति में हम प्रबुद्ध पाठकों के लिए वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का महत्त्वपूर्ण आलेख “आत्मा का अंश और इतिहास का मलबा: सविता सिंह और एड्रिएन रिच का स्त्रीवादी काव्य-संवाद” पेश कर रहे हैं, जो समकालीन…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रोफ़ेसर रवि रंजन का विचारोत्तेजक आलेख—“आभासी दोस्ती के दौर में ‘दोस्त’: अरुण कमल की कविता का एक अंतर्पाठीय विमर्श” पेश है ।  समकालीन समय में जब मानवीय संबंधों की संरचना तीव्र गति से बदल…

Continue Reading