‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का ‘धूमिल’ की कालजयी कविता ‘पटकथा’ का पुनर्पाठ प्रकाशित किया जा रहा है। यह आलेख ‘पटकथा’ को किसी एक सीमित विचारधारात्मक चौखटे में बाँधने के बजाय उसकी बहुस्तरीय व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें रेमंड विलियम्स की ‘अनुभूति की…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का कवि संतोष चतुर्वेदी की प्रसिद्ध ‘दुभाषिए’ कविता के समाजभाषावैज्ञानिक विश्लेषण पर केन्द्रित आलेख प्रकाशित किया जा रहा है, जो समकालीन साहित्यिक विमर्श में एक मूल्यवान हस्तक्षेप है। इसमें…
ब्रज श्रीवास्तव समकालीन कविता के स्वर हैं। आपने अपनी कविताओं के माध्यम से आज के समय की आलोचना की है। इस आलोचना का स्वर रचनात्मक है। आपमें ह्यूमर है ,चिढ़ाने वाला नहीं वरन् गहरे पैथाज़ में डुबाने वाला। रचना समय…
पत्रकार,कहानीकार, कवि, फिल्मकार और नाटककार विवेक आसरी अपने शब्दों और छवियों के ज़रिए समाज, सत्ता और इंसानी रिश्तों की पड़ताल करते दिखाई देते हैं. इंसाफ़ एक सीधी रेखा है नाटक के बाद हाल ही में उनका नया नाटक प्रकाशित हुआ…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में राजेश जोशी, मदन कश्यप और श्रीप्रकाश शुक्ल की कविताओं पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है. इसमें ‘झुकना’ जैसी सामान्य शारीरिक मुद्रा को लेकर रचित तीन कविताओं को विभिन्न…
