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रसखान हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे।  उनकी रचनाओं में कृष्ण के प्रति प्रेम, भक्ति, वात्सल्य और ब्रज की प्राकृतिक छटा का अत्यंत मनोहारी चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ ‘प्रेमवाटिका’ और ‘सुजान रसखान’ हैं। उनकी भाषा सरल,…

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समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में विमलचन्द्र पाण्डेय की कहानी ‘ऊब महासागर’ हमारे समय के महानगरीय जीवन की उस गहरी आंतरिक रिक्तता का सशक्त आख्यान है, जहाँ तकनीकी प्रगति, उपभोक्तावादी जीवनशैली और आभासी संवादों के बीच मनुष्य धीरे-धीरे अपनी संवेदनात्मक ऊष्मा खोता जाता है। वरिष्ठ आलोचक…

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रचना समय’ की इस प्रस्तुति में तरुण भटनागर की कहानी ‘ज़ख़्मे-कुहन’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है। समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में तरुण भटनागर की कहानी ‘ज़ख़्मे-कुहन’ उन विरल रचनाओं में है जो एक साधारण-सी प्रतीत होने वाली…

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लीलाधर मंडलोई की प्रस्तुत कविताएँ आज के समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और मानवीय आकांक्षाओं का दस्तावेज़ हैं। बेटी, प्रेम, कला, मातृभाषा, युद्ध, विस्थापन और बदलते सामाजिक संबंधों जैसे विषय यहां गहरी संवेदना और वैचारिक सजगता के साथ साकार हुए हैं।…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य की महत्त्वपूर्ण कथाकार सारा राय की चर्चित कहानी ‘अबाबील की उड़ान’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का यह आलेख कहानी के बहुस्तरीय अर्थ-संसार को नई दृष्टि से उद्घाटित करता है। आलेख…

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