Press ESC to close

पत्रकार,कहानीकार, कवि, फिल्मकार और नाटककार विवेक आसरी अपने शब्दों और छवियों के ज़रिए समाज, सत्ता और इंसानी रिश्तों की पड़ताल करते दिखाई देते हैं. इंसाफ़ एक सीधी रेखा है नाटक के बाद हाल ही में उनका नया नाटक प्रकाशित हुआ…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में राजेश जोशी, मदन कश्यप और श्रीप्रकाश शुक्ल की कविताओं पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है. इसमें ‘झुकना’ जैसी सामान्य शारीरिक मुद्रा को लेकर रचित तीन कविताओं को विभिन्न…

Continue Reading

श्रुति कुशवाहा समकालीन कविता का एक ज़रूरी नाम हैं। श्रुति मात्र स्त्री प्रतिरोध का आख्यान नहीं बल्कि स्मृति , इतिहास की बेचैनी का रचनात्मक संवाद रचती हैं। श्रुति अपने अनुभव – संसार में ठस वैचारिकता के बदले सामान्य से जीवन…

Continue Reading

उर्दू के महान शायर मीर तक़ी  मीर के पूर्वज सऊदी अरब से भारत आए थे। वह राजनीतिक उथल – पुथल का दौर था। नादिर शाह और अहमद शाह दुर्रानी के आक्रमणों से सब दूर ख़ौफ़ फैला  था। 1723 में आगरा…

Continue Reading

‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर रवि रंजन का अज्ञेय की कालजयी कविता ‘असाध्य वीणा’ पर केन्द्रित दीर्घ आलेख प्रकाशित किया जा रहा है,जो इस महान कविता का एक गंभीर, व्यापक और बहुआयामी पुनर्पाठ प्रस्तुत करता है।  प्रचंड…

Continue Reading