‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है, जिसमें पोलिश समाजशास्त्री ज़िगमुंट बॉमन समेत एरिक एरिक्सन, ज्यां पॉल सार्त्र और अल्बेयर कामू जैसे महत्त्वपूर्ण चिंतकों की अवधारणाओं के आलोक में वरिष्ठ…
‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख “सांस्कृतिक स्मृति का नैतिक आलोक: श्रीप्रकाश शुक्ल की ‘गुरु के नाम’ कविता का पुनर्पाठ” प्रकाशित किया जा रहा है, जो समकालीन हिंदी आलोचना के क्षेत्र में एक विचारोत्तेजक हस्तक्षेप है। इस आलेख…
रसखान हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाओं में कृष्ण के प्रति प्रेम, भक्ति, वात्सल्य और ब्रज की प्राकृतिक छटा का अत्यंत मनोहारी चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ ‘प्रेमवाटिका’ और ‘सुजान रसखान’ हैं। उनकी भाषा सरल,…
समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में विमलचन्द्र पाण्डेय की कहानी ‘ऊब महासागर’ हमारे समय के महानगरीय जीवन की उस गहरी आंतरिक रिक्तता का सशक्त आख्यान है, जहाँ तकनीकी प्रगति, उपभोक्तावादी जीवनशैली और आभासी संवादों के बीच मनुष्य धीरे-धीरे अपनी संवेदनात्मक ऊष्मा खोता जाता है। वरिष्ठ आलोचक…
रचना समय’ की इस प्रस्तुति में तरुण भटनागर की कहानी ‘ज़ख़्मे-कुहन’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है। समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में तरुण भटनागर की कहानी ‘ज़ख़्मे-कुहन’ उन विरल रचनाओं में है जो एक साधारण-सी प्रतीत होने वाली…
