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श्रुति कुशवाहा समकालीन कविता का एक ज़रूरी नाम हैं। श्रुति मात्र स्त्री प्रतिरोध का आख्यान नहीं बल्कि स्मृति , इतिहास की बेचैनी का रचनात्मक संवाद रचती हैं। श्रुति अपने अनुभव – संसार में ठस वैचारिकता के बदले सामान्य से जीवन…

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उर्दू के महान शायर मीर तक़ी  मीर के पूर्वज सऊदी अरब से भारत आए थे। वह राजनीतिक उथल – पुथल का दौर था। नादिर शाह और अहमद शाह दुर्रानी के आक्रमणों से सब दूर ख़ौफ़ फैला  था। 1723 में आगरा…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर रवि रंजन का अज्ञेय की कालजयी कविता ‘असाध्य वीणा’ पर केन्द्रित दीर्घ आलेख प्रकाशित किया जा रहा है,जो इस महान कविता का एक गंभीर, व्यापक और बहुआयामी पुनर्पाठ प्रस्तुत करता है।  प्रचंड…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख प्रकाशित किया जा रहा है, जिसमें पोलिश समाजशास्त्री  ज़िगमुंट बॉमन समेत एरिक एरिक्सन, ज्यां पॉल सार्त्र और अल्बेयर कामू जैसे महत्त्वपूर्ण चिंतकों की अवधारणाओं के आलोक में वरिष्ठ…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख “सांस्कृतिक स्मृति का नैतिक आलोक: श्रीप्रकाश शुक्ल की ‘गुरु के नाम’ कविता का पुनर्पाठ” प्रकाशित किया जा रहा है, जो समकालीन हिंदी आलोचना के क्षेत्र में एक  विचारोत्तेजक हस्तक्षेप है। इस आलेख…

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