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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रमुख समकालीन कवयित्री सविता सिंह की बहुचर्चित और विचारोत्तेजक कविता ‘मैं किसकी औरत हूँ’ पर केन्द्रित वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर रवि रंजन का एक गंभीर, विस्तृत और बहुआयामी आलेख प्रस्तुत है।  हिन्दी कविता में स्त्री-अस्मिता,…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में प्रतिष्ठित रचनाकार और स्त्रीवादी आलोचक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का आलेख “इंटरसेक्शनैलिटी और स्त्री आत्मकथाएँ” दिया जा रहा है, जो स्त्री विमर्श को एक बेहद ज़रूरी और विचारोत्तेजक धरातल प्रदान करता है। यह आलेख पश्चिमी…

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रचना समय‘ की इस प्रस्तुति में “वैश्विक चौखट पर पाँच दरवाज़ा : शून्य से सृजन तक” शीर्षक वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का आलेख हिंदी आलोचना की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो कविता को केवल स्थानीय या राष्ट्रीय संदर्भ में नहीं, बल्कि…

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‘रचना समय’ की इस प्रस्तुति में वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का तरुण भटनागर की कथा-संवेदना पर एक अत्यंत गंभीर और सूक्ष्म ‘उत्तर-औपनिवेशिक पाठ’ प्रस्तुत किया जा रहा है । आलेख इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे तरुण…

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“रचना समय” की इस प्रस्तुति में हम प्रबुद्ध पाठकों के लिए वरिष्ठ आलोचक प्रोफ़ेसर रवि रंजन का महत्त्वपूर्ण आलेख “आत्मा का अंश और इतिहास का मलबा: सविता सिंह और एड्रिएन रिच का स्त्रीवादी काव्य-संवाद” पेश कर रहे हैं, जो समकालीन…

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