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डाॅ. तबस्सुम बेग़म हिंदी आलोचना का एक युवा नाम है। आपने हैदराबाद विश्ववविद्यालय से पीएच -डी की उपाधि प्राप्त की। कई काॅलेजों में अध्पापन के साथ आप मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालयों में अतिथि प्राध्यापिका रहीं।…

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“नकारती हूं निर्वासन” प्रभा मुजुमदार लिखित कविता संग्रह मनुष्य के भाव जगत, सामाजिक अंतर्विरोधों, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विघटनकारी शक्तियों को विश्लेषित कर उन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दृष्टिपात करता है जिनका संज्ञान लिए बिना एक सुखद समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को…

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श्रुति कुशवाहा के काव्य संग्रह ‘ सुख को भी दुख होता है’ को तोलस्तोय के अन्ना कारेनिना उपन्यास की इस पंक्ति के आलोक में देखें कि ‘सभी ख़ुशहाल परिवार एक जैसे होते हैं और हर दुखी परिवार अपने तरीके से…

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कैलाश बनवासी नौवे दशक के अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण कथाकार हैं। कैलाश की कहानियों से गुज़रें तो स्पष्ट होता है कि वे वंचित समाज के प्रति गहरी सहानुभूति रखने वाले उसकी पीड़ा के गायक हैं। प्रारम्भिक कहानी ‘कुकरा कथा’ से लेकर…

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तरुण भटनागर हिंदी कथा के नौवे दशक के बाद की पीढ़ी के सबसे प्रतिभाशाली कथाकार हैं। चार उपन्यास जिनमें एक शीघ्रप्रकाश्य है तथा कई कथा संग्रह तरुण के छप चुके हैं जो पाठकों के बीच भारी चर्चा के साथ उनके…

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