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स्त्री हर काल में उपेक्षित और तिरस्कृत रही। ऐसा माना जाता है कि स्त्रीवादी दृष्टिकोण ही था जो स्त्रियों को भी मनुष्य माने जाने और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार की माँग किए जाने के साथ उभरा। समय के साथ -साथ…

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तकनीक और भीड़ के इस दौर में अकेलापन एक सार्वभौमिक अनुभव बन चुका है। साहित्य के साथ सिनेमा, इस अकेलेपन को वैश्विक स्तर पर एक प्रबल संवेदना के रूप में दर्ज़ कर रहा है। पिछले वर्षों चर्चा में आईं ‘हर’( …

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मिलान कुंदेरा चेकोस्लोवाकिया के ब्रनो में 1अप्रैल1929 में जन्मे चचिॅत उपन्यासकार हैं। 1975 में अपनी विरोधी विचारधारा के कारण देशनिकाला मिलने के बाद कुंदेरा फ्रांस चले गए और बाद में वे फ्रांस के नागरिक बन गए। कुंदेरा ने चेक और…

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मोहन सगोरिया कवि होने के साथ एक गद्यकार भी हैं। उनका गद्य पाठकों को इस तरह बांध लेता है कि उससे विलग हो पाना सहज-सरल नहीं होता। मोहन विश्वसनीय लहजे़ से अपनी बात के लिए चौंकाते भी हैं; किंतु यहां…

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ललन चतुवेॅदी समकालीन कविता का एक पहचाना नाम है। ललन छोटे-छोटे जीवन- प्रसंगों से कविता का प्रासाद खड़ा करते हैं जिसमें समय- समाज का प्रतिबिंब होता है। बहुत ही ख़ामशी से ललन काव्य – सृजन करते हैं। आप व्यंग्य लेखक…

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