Press ESC to close

मुंशी प्रेमचंद के बाद जो कथा पीढ़ी सक्रिय रही, उनमें अज्ञेय, इलाचंद्र जोशी, उपेन्द्रनाथ अश्क के साथ जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ का नाम भारी आदर के साथ लिया जाता है। वनमाली कथाकार के साथ शिक्षाविद थे। 1934 में ‘ जिल्दसाज़…

Continue Reading

विनोद कुमार शुक्ल समकालीन साहित्यिक परिदृश्य में एक समादृत नाम हैं। आपने अपनी लेखन – शैली विकसित की है जिसका साहित्य जगत में भारी नाम है। लेकिन यह लेखन – शैली एक क्लिशे जैसी है। बावजूद इसके रचनाकार की भारी…

Continue Reading

गोलेन्द्र पटेल को मैं पहली बार पढ़ रहा हूं। पढ़ते ही लगा कि किसान – मजूर चेतना का यह कवि अपने समय – समाज को नई दृष्टि से देख रहा है। कविता नया करवट ले रही है। इस कवि की…

Continue Reading

लेव तोलस्तोय की एक कहानी है – इवान इल्यीच की मृत्यु। यह कहानी मृत्यु की भयावहता की नहीं है , वरन् अपने दायरे से बाहर पैर पसारने पर मृत्यु इंसान को कैसे अपनी तरफ़ खीचती है – यह कहानी का…

Continue Reading

रचना किसी भी काल -खण्ड की हो सकती है लेकिन उसमें तत्कालीन जीवन का प्रतिबिम्ब होना ज़रूरी है, तभी वह सार्थकता की अर्थवत्ता प्राप्त कर पाती है। सौमित्र की प्रस्तुत गोपिका कहानी महाभारतकालीन समय की है लेकिन यह तत्कालीन जीवन…

Continue Reading