भगवानदास मोरवाल कहानी ही नहीं, हिंदी उपन्यास का एक बड़ा नाम है। मोरवाल ने अभी तक ग्यारह उपन्यासों की रचना की है जिसमें वंचित समाज के दुख – दर्द, आशा – निराशा और उसके उल्लास का प्रतिबिम्ब है। ‘…
मनुष्य आज हर तरफ़ अजीब – सी अबूझ स्थितियों से घिरा हुआ है। उससे उबरने का किया गया हर प्रयास उबारने की बजाय उसे और उलझाता जा रहा है।आज मनुष्य की सिर्फ़ एक ही पहचान बची रह गई है –…
निर्मला भुराड़िया नौवे दशक की महत्त्वपूर्ण कथालेखिका हैं। कहन का अंदाज़ निर्मला का चुहलभरा है जिसके आलोक में सामाजिक बुराई – विद्रूपता छुप नहीं पाती। निर्मला में व्यंग्य की एक ऐसी मीठी मार दीखती है जो अनायास ही उन्हें परसाई,…
तरुण भटनागर की यह कहानी भूगोल के उस दरवाज़े की तरफ़ इशारा कर रही है जिसमें सिर्फ़ वे ही प्रवेश कर सकते हैं जो हत्यारे हैं , लूट- खसोट में भरोसा रखते हैं। अपने अस्तित्व के लिए जो विरोध करेंगे,…
‘ यही तुम थे ‘ पंकज चतुवेॅदी की वीरेन डंगवाल के कवि के बहाने कवि व्यक्तित्व पर संस्मरण की किताब है। पंकज चतुवेॅदी ने वीरेन डंगवाल के व्यक्तित्व के अनदेखे पहलुओं को भी उजागर किया है। प्रोफ़ेसर रवि रंजन ने…
