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रचनाकार दूधनाथ सिंह ने आज से तकरीबन तीस बरस पहले मुझे एक ख़त लिखा था। यह ख़त बोधिसत्व की कविताई को लेकर था। बोधिसत्व को उन्होंने किसान – चेतना का कवि बताते हुए कहा था कि यह कवि हमें क़दम…

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कात्यायनी की प्रतिबद्धता और प्रतिपक्ष उनके जीवन और उनकी कविताओं में अभिव्यक्त होता है। उनका स्वर प्रतिरोध का स्वर है। स्वयं उनके शब्दों में—‘‘…कवि को कभी-कभी लड़ना भी होता है, बंदूक़ भी उठानी पड़ती है और फ़ौरी तौर पर कविता…

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राजेश जोशी, अरुण कमल, मनमोहन, असद ज़ैदी , नवीन सागर की काव्य पीढ़ी में मंगलेश डबराल कविता का एक अत्यंत रौशन नाम है। जिन्होंने भी मंगलेश के पहले काव्य संग्रह – पहाड़ पर लालटेन – को पढ़ा – पूर्ववतीॅ कविताओं…

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अंग्रेजी से अनुवाद : आनंद बहादुर   अल्बैर कामू का जन्म अफ्रीका के एक छोटे से गुलाम देश अल्जीरिया में 1913 में हुआ जहां फ्रांस का क्रूर शिकंजा था। इस शिकंजे के बीच कामू का रचनात्मक मानस निमिॅत हुआ। कामू…

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  पवन करण हिंदी कविता के नौवे दशक के बाद के महत्त्वपूर्ण कवि हैं जिन्होंने स्त्री विषयक कविताओं की प्रस्तुति से हिंदी समाज का ध्यान आकृष्ट किया। प्रस्तुत कविताएं इंद्र की विभिन्न अप्सराओं के माध्यम से भारतीय समाज में स्त्रियों…

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