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1. गोंद इकट्ठा करने वाली बच्चियां वे गोंद इकट्ठा करने वाली बच्चियां हैं बबूल के तनों से बाहर जो फूटता है प्रखर सूर्य के ताप से टीकाटीक दोपहर में वे चूसती हैं आम हवा के झोंके से जो टपक कर…

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कहानी जाने कहाँ से वे सब के सब एकसाथ नमूदार हुए और गली-गली अपना हुनर दिखाने में मशगूल हो गये थे। दिखने में बहुत ही साधारण, किंतु गज़ब के कारीगर। औरत, मर्द, बच्चों की शक्ल में वे इस तरह छा…

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स्वर्गीय कवि स्वर्गीय कवि बहुत भला है किसी की किसी बात का बुरा नहीं मानता किसी से किसी बात पर झगड़ता नहीं किसी से ईर्ष्या नहीं करता भूल जाने पर दुखी नहीं होता याद करो तो खुश नहीं होता बेहद…

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 कहानी फरवरी माह…जाती हुई ठंड के दि‍न हैं। रोज की तरह मैं गंगा घाट के कि‍नारे बैठी हूं। उन घाटों से बहुत दूर…जहां शाम को आरती होती है। शुरू में उत्‍सुकता थी, तो जाती थी दशाश्‍वमेध घाट गंगा आरती देखने।…

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  निराला ने छंद में मानीख़ेज़ कविताएं लिखीं। छंद से मुक्ति भी निराला ने की। कविता और कवि ,निराला का कर्ज़ कभी चुका नहीं सकते।सो आज पहले उनकी ग़ज़लों को याद करते हैं।दोआब की परंपरा के वे अज़ीम शायर हैं…

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