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निर्मला भुराड़िया नौवे दशक की महत्त्वपूर्ण कथालेखिका हैं। कहन का अंदाज़ निर्मला का चुहलभरा है जिसके आलोक में सामाजिक बुराई – विद्रूपता छुप नहीं पाती। निर्मला में व्यंग्य की एक ऐसी मीठी मार दीखती है जो अनायास ही उन्हें परसाई,…

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तरुण भटनागर की यह कहानी भूगोल के उस दरवाज़े की तरफ़ इशारा कर रही है जिसमें सिर्फ़ वे ही प्रवेश कर सकते हैं जो हत्यारे हैं , लूट- खसोट में भरोसा रखते हैं। अपने अस्तित्व के लिए जो विरोध करेंगे,…

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‘ यही तुम थे ‘ पंकज चतुवेॅदी की वीरेन डंगवाल के कवि के बहाने कवि व्यक्तित्व पर संस्मरण की किताब है। पंकज चतुवेॅदी ने वीरेन डंगवाल के व्यक्तित्व के अनदेखे पहलुओं को भी उजागर किया है। प्रोफ़ेसर रवि रंजन ने…

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यतीन्द्र मिश्र कविता के साथ कला के विभिन्न अनुशासनों पर क़लम चलाते रहे हैं। गिरिजादेवी, उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां ,बेगम अख़्तर , लता मंगेशकर और गुलज़ार पर आपकी बहुचर्चित पुस्तकें हैं। फ़िल्म और साहित्य के कई महत्त्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाजे गए…

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पद्मा शर्मा की यह कहानी यौन शोषण के विरोध की कहानी है जिसे लेखिका ने आज़ादी की संज्ञा दी है। यह आज़ादी कितनी दीर्घजीवी है – यह विचारणीय पक्ष है । किन्तु लेखिका की क़लम की सराहना करनी ही होगी…

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