प्रेम ध्रुपद एक प्रेम कविता है जिसे लीलाधर मण्डलोई ने पुकार संज्ञा से अभिहित किया है। देखा जाए तो यह एकायामी प्रेम कविता नहीं है, बल्कि यह सृष्टि का मेटाफर है । इसमें अव्यक्त – अदृश्य स्वप्न कामना की प्रार्थनाएं…
महात्मा गांधी ने तकरीबन एक लाख के ऊपर चिट्ठियां लिखीं। इन चिट्ठियों से गुज़रने पर ज्ञात होता है कि गांधी जी देश की आज़ादी के साथ विश्व – शांति के लिए कितने चिंतित रहते थे। महान लेखक लेव तोल्स्तोय को…
ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह, दूधनाथ सिंह, विजयमोहन सिंह और रवीन्द्र कालिया की कथा पीढ़ी के बाद जो कथा पीढ़ी कथा का बदलाव लेकर आई – असग़र वजाहत उनमें सबसे महत्त्वपूर्ण नाम हैं। असग़र वजाहत छोटी कहानियों के लिए विख्यात हैं जिनको…
रचनाकार दूधनाथ सिंह ने आज से तकरीबन तीस बरस पहले मुझे एक ख़त लिखा था। यह ख़त बोधिसत्व की कविताई को लेकर था। बोधिसत्व को उन्होंने किसान – चेतना का कवि बताते हुए कहा था कि यह कवि हमें क़दम…
कात्यायनी की प्रतिबद्धता और प्रतिपक्ष उनके जीवन और उनकी कविताओं में अभिव्यक्त होता है। उनका स्वर प्रतिरोध का स्वर है। स्वयं उनके शब्दों में—‘‘…कवि को कभी-कभी लड़ना भी होता है, बंदूक़ भी उठानी पड़ती है और फ़ौरी तौर पर कविता…
