नरेश चंद्रकर की इन नम कविताओं में अदृश्य उदासी के बीच स्मृतियों में बीता समय ,लोग और जगहें आज में जीवंत हैं।मैं जैसे कवि की बंद आंखों से देखता हूं कि वहां प्रेम कृष्ण रंग में है।वह लेकिन आने में…
प्रेमकुमार मणि कथाकार के साथ राजनीतिकमीॅ भी हैं।हिंदी कथा लेखन के साथ आप वैचारिक लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। हाल ही में आपकी ‘अकथ कहानी’ आत्मकथा प्रकाशित होकर आई है। इस आत्मकथा में मणि के जीवन के अजाने…
यह किताब दो खंडों में है। पहले खंड में आर.बी. मोरे की आत्मकथा है, जो अधूरी है। अपनी आत्मकथा पूरी करने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। बाद में उनके बेटे सत्येन्द्र मोरे, जो खुद सीपीआई(एम) के महत्त्वपूर्ण नेता…
बोधिसत्व हिंदी कविता के नवे दशक के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि हैं। प्रारंभिक कविताओं को देखकर डा. नामवर सिंह और दूधनाथ सिंह ने कहा था कि किसान – चेतना का यह कवि अभी पौधा है जो धीरे- धीरे विकसित होकर एक…
डा. नामवर सिंह भारतीय साहित्यिक आलोचना के शीर्ष पुरुष थे। 28 जुलाई 1926 को वाराणसी में जन्मे डा. नामवर सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। आप J N U के भारतीय भाषा केंद्र के…
