कहानी जाने कहाँ से वे सब के सब एकसाथ नमूदार हुए और गली-गली अपना हुनर दिखाने में मशगूल हो गये थे। दिखने में बहुत ही साधारण, किंतु गज़ब के कारीगर। औरत, मर्द, बच्चों की शक्ल में वे इस तरह छा…
स्वर्गीय कवि स्वर्गीय कवि बहुत भला है किसी की किसी बात का बुरा नहीं मानता किसी से किसी बात पर झगड़ता नहीं किसी से ईर्ष्या नहीं करता भूल जाने पर दुखी नहीं होता याद करो तो खुश नहीं होता बेहद…
कहानी फरवरी माह…जाती हुई ठंड के दिन हैं। रोज की तरह मैं गंगा घाट के किनारे बैठी हूं। उन घाटों से बहुत दूर…जहां शाम को आरती होती है। शुरू में उत्सुकता थी, तो जाती थी दशाश्वमेध घाट गंगा आरती देखने।…
निराला ने छंद में मानीख़ेज़ कविताएं लिखीं। छंद से मुक्ति भी निराला ने की। कविता और कवि ,निराला का कर्ज़ कभी चुका नहीं सकते।सो आज पहले उनकी ग़ज़लों को याद करते हैं।दोआब की परंपरा के वे अज़ीम शायर हैं…
आख़िरी मादा -नरेंद्र प्रताप सिंह उसने फुसफुसाकर कहा – उन्होंने रेशमी को पकड़ लिया है और अपने साथ ले गए ।देखने से ही उसके चेहरे पर घबराहट और भय का ऐसा लेप था कि समोध भी उलझन में पड़…
