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नदी का तीसरा किनारा -मूल लेखक : जोआओ गुइमारेस रोसा -अनुवाद : सुशांत सुप्रिय पिता एक ज़िम्मेदार , भरोसे के क़ाबिल और व्यावहारिक आदमी थे । बचपन से ही वे ऐसे ही थे । जब मैंने पिता को जानने वाले…

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सुखी राजकुमार -मूल लेखक : ऑस्कर वाइल्ड -अनुवाद : सुशांत सुप्रिय शहर से बहुत ऊँचाई पर एक लम्बे स्तम्भ पर सुखी राजकुमार की मूर्ति खड़ी थी । उसकी पूरी मूर्ति पर सोने का पानी चढ़ा हुआ था । मूर्ति की…

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सकरिया रहता किस देश में है -अमिताभ मिश्र बीस साल पहले लिखी एक कविता से बाहर निकल कर सकरिया एकदम मेरे सामने खड़ा हो गया। वह सकरिया जो छककर दारू, ताड़ी पीता, वह सकरिया जो रोज अपने पेट का गड्ढा…

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प्रांजल धर की कविताएँ गुनाह था (अरुण कमल, राजेश जोशी, लीलाधर मंडलोई, जितेन्द्र श्रीवास्तव, संजय मिश्र, वाज़दा खान और वन्दना मिश्रा के लिए) अन्याय का प्रतिकार किया, यह गुनाह था, चापलूसी नहीं की, यह गुनाह था, चुगलखोरी नहीं की, यह…

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  कला साहित्य और वर्तमान विसंगति -अच्युतानंद मिश्र दुःख, करुणा, प्रेम, बिडम्बना, विषाद, त्रासदी और नाटकीयता- ये साहित्य-कला के स्थायी और आदिम मूल्य रहे हैं। कह सकते हैं कि इन्हीं मूल्यों के फलस्वरूप कला का अविर्भाव हुआ है। ये सभी…

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