Press ESC to close

चौरी चौरा विद्रोह और स्वाधीनता संग्राम -सुभाष चन्द्र कुशवाहा (प्रस्तुत आलेख मेरी पुस्तक-‘चौरी चौराःविद्रोह और स्वाधीनता आन्दोलन’ से लिया गया है, जो पेंग्विन बुक्स इंडिया प्रा. लि. से प्रकाशित हुई है। पूरी पुस्तक को मुख्यतः ब्रिटिशकालीन मूल दस्तावेजों के आधार…

Continue Reading

मीर : आपबीती से जगबीती तक -लीलाधर मंडलोई गयी वो बात कि हो, गुफ़्तगू तो क्यूं कर हो कहे से कुछ न हुआ फिर कहो तो क्यूं कर हो अपनी बात रखने के पहले ,मीर साहब की ज़िंदगी से, इक…

Continue Reading

मृत्यु जहाँ ढाई हज़ार फीट लगभग लम्बी लेकिन बहुत साधारण सी वादी ख़त्म होती है, वहाँ से लगभग पचास कदम बाद की ढलान पर यह तिराहा है। बहुत एकान्त और अनाकर्षक तिराहा। इस जगह से कभी-कभी एक दो मोटरें, एक…

Continue Reading

अयप्पन -मुकेश वर्मा जंगल की रात है। अयप्पन तेज कदमों से चलता चला जा रहा है। तेज चाल के लिए सारे इलाके में मशहूर है। साँवला गठीला बदन, सुतवां चेहरा और लोहे के कील-सी नोकदार मूंछे जो होठों के आखिरी…

Continue Reading

राख में दबी चिंगारी -अरविंद कुमार सिंह विनय की मौत से मुझे गहरा सदमा लगा। उसकी जेब से मिले कागज़ के एक पुर्जे पर एक टिप्पणी है, जैसे छुप-छुपाकर जल्दबाजीमें लिखी गई हो, ‘ समय बहुत खराब है। आंखें बंद…

Continue Reading