कविताएं 1.।। भागलपुरी चादर ।। मूलतः किसान थे रामसुफल, कहते कभी गांधी जी को देखा था किसी सभा मे, तभी से विदेशी चीजों का उपयोग करने,व बेचने से बचते रहे सदा,वैसे हमेशा से,वे खरीफ और रबी की फसल कट जाने…
बाबू जी की छतरी -अवधेश प्रीत छतरी मामूली मरम्मत से ठीक हो सकती थी और एहतियात के साथ इस्तेमाल करने पर कई सीजन आराम से निकाल सकती थी, यही सोचकर वह छतरी लेकर घर से चला था और मन ही…
तानाशाह नंबर चार -ज्ञान चतुर्वेदी (कि देशप्रेम में बाधा है प्रेम ,और ये बात बादशाह को बर्दाश्त नहीं ) चलिये , अब उस तानाशाह से मिलते हैं जिसकी ताबेदारी में न केवल ये तीनों तानाशाह हैं , पूरा देश ही …
वसु गंधर्व की कविताएं छाया मृत्यु से पहले दादाजी, अपने पूर्ववर्ती दिनों की छाया थे हम सब ऐसा कहा करते थे वे दिनों को भूल रहे थे, और अपने नाम को, और अपने जीवन की तमाम कथाओं को। इसका…
काठ के पुतले -प्रज्ञा ललिता के लिए रोज़ का देखा-भाला रास्ता अब पहले जैसा कहां रह गया था। घर के छोटे से गेट के बाहर की लंबी गली से गुजरकर चैक की आठ-दस दुकानों के मोहल्ले के बाजार के पार…
