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कहानी सुबह साढ़े पांच बजे मोबाइल की घंटी बजी. इतनी सुबह फोन सदैव मेरे मस्तिष्क में एक ही विचार को जन्म देता है कि ’कुछ सही नहीं.’ हर बार नहीं लेकिन अनेक बार मेरी आशंका सही सिद्ध होती रही. फोन…

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कहानी महानगर का बाहरी इलाका जो धीरे-धीरे आबाद हो रहा है, एक चलती-फिरती सड़क का तिराहा। दाँई और एक बड़ा ऊबड़-खाबड़ मैदान है जो दूसरी ओर की कच्ची सड़क से जुड़ता है। कच्ची सड़क के किनारे झुग्गी-झोपड़ियों की बस्ती है।…

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1. गोंद इकट्ठा करने वाली बच्चियां वे गोंद इकट्ठा करने वाली बच्चियां हैं बबूल के तनों से बाहर जो फूटता है प्रखर सूर्य के ताप से टीकाटीक दोपहर में वे चूसती हैं आम हवा के झोंके से जो टपक कर…

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कहानी जाने कहाँ से वे सब के सब एकसाथ नमूदार हुए और गली-गली अपना हुनर दिखाने में मशगूल हो गये थे। दिखने में बहुत ही साधारण, किंतु गज़ब के कारीगर। औरत, मर्द, बच्चों की शक्ल में वे इस तरह छा…

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स्वर्गीय कवि स्वर्गीय कवि बहुत भला है किसी की किसी बात का बुरा नहीं मानता किसी से किसी बात पर झगड़ता नहीं किसी से ईर्ष्या नहीं करता भूल जाने पर दुखी नहीं होता याद करो तो खुश नहीं होता बेहद…

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