प्रांजल धर की कविताएँ गुनाह था (अरुण कमल, राजेश जोशी, लीलाधर मंडलोई, जितेन्द्र श्रीवास्तव, संजय मिश्र, वाज़दा खान और वन्दना मिश्रा के लिए) अन्याय का प्रतिकार किया, यह गुनाह था, चापलूसी नहीं की, यह गुनाह था, चुगलखोरी नहीं की, यह…
कला साहित्य और वर्तमान विसंगति -अच्युतानंद मिश्र दुःख, करुणा, प्रेम, बिडम्बना, विषाद, त्रासदी और नाटकीयता- ये साहित्य-कला के स्थायी और आदिम मूल्य रहे हैं। कह सकते हैं कि इन्हीं मूल्यों के फलस्वरूप कला का अविर्भाव हुआ है। ये सभी…
चौरी चौरा विद्रोह और स्वाधीनता संग्राम -सुभाष चन्द्र कुशवाहा (प्रस्तुत आलेख मेरी पुस्तक-‘चौरी चौराःविद्रोह और स्वाधीनता आन्दोलन’ से लिया गया है, जो पेंग्विन बुक्स इंडिया प्रा. लि. से प्रकाशित हुई है। पूरी पुस्तक को मुख्यतः ब्रिटिशकालीन मूल दस्तावेजों के आधार…
मीर : आपबीती से जगबीती तक -लीलाधर मंडलोई गयी वो बात कि हो, गुफ़्तगू तो क्यूं कर हो कहे से कुछ न हुआ फिर कहो तो क्यूं कर हो अपनी बात रखने के पहले ,मीर साहब की ज़िंदगी से, इक…
मृत्यु जहाँ ढाई हज़ार फीट लगभग लम्बी लेकिन बहुत साधारण सी वादी ख़त्म होती है, वहाँ से लगभग पचास कदम बाद की ढलान पर यह तिराहा है। बहुत एकान्त और अनाकर्षक तिराहा। इस जगह से कभी-कभी एक दो मोटरें, एक…
