यह किताब दो खंडों में है। पहले खंड में आर.बी. मोरे की आत्मकथा है, जो अधूरी है। अपनी आत्मकथा पूरी करने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। बाद में उनके बेटे सत्येन्द्र मोरे, जो खुद सीपीआई(एम) के महत्त्वपूर्ण नेता…
बोधिसत्व हिंदी कविता के नवे दशक के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि हैं। प्रारंभिक कविताओं को देखकर डा. नामवर सिंह और दूधनाथ सिंह ने कहा था कि किसान – चेतना का यह कवि अभी पौधा है जो धीरे- धीरे विकसित होकर एक…
डा. नामवर सिंह भारतीय साहित्यिक आलोचना के शीर्ष पुरुष थे। 28 जुलाई 1926 को वाराणसी में जन्मे डा. नामवर सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। आप J N U के भारतीय भाषा केंद्र के…
ज्यां पाल सार्त्र फ्रांस के ही नहीं, वरन् विश्व के महान रचनाकार हैं। 21जून 1905 में जन्मे सार्त्र के पिता की मृत्यु इंडोनेशिया युद्ध में हुई,तब सार्त्र 9 वर्ष के थे। शिक्षा – दीक्षा सार्त्र की ननिहाल में हुई। नाना…
भगवान दास मोरवाल हिंदी कहानी के नौवे दशक के समादृत कथाकार हैं। देश की राजधानी से सटे मेवात का प्रतिनिधित्त्व करने वाले मोरवाल के अभी तक ग्यारह उपन्यास जिनमें काला पहाड़, रेत, नरक मसीहा, सुर बंजारन, ख़ानज़ादा, मोक्षवन और कांस…
