“नकारती हूं निर्वासन” प्रभा मुजुमदार लिखित कविता संग्रह मनुष्य के भाव जगत, सामाजिक अंतर्विरोधों, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विघटनकारी शक्तियों को विश्लेषित कर उन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दृष्टिपात करता है जिनका संज्ञान लिए बिना एक सुखद समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को…

Continue Reading

श्रुति कुशवाहा के काव्य संग्रह ‘ सुख को भी दुख होता है’ को तोलस्तोय के अन्ना कारेनिना उपन्यास की इस पंक्ति के आलोक में देखें कि ‘सभी ख़ुशहाल परिवार एक जैसे होते हैं और हर दुखी परिवार अपने तरीके से…

Continue Reading

कैलाश बनवासी नौवे दशक के अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण कथाकार हैं। कैलाश की कहानियों से गुज़रें तो स्पष्ट होता है कि वे वंचित समाज के प्रति गहरी सहानुभूति रखने वाले उसकी पीड़ा के गायक हैं। प्रारम्भिक कहानी ‘कुकरा कथा’ से लेकर…

Continue Reading

तरुण भटनागर हिंदी कथा के नौवे दशक के बाद की पीढ़ी के सबसे प्रतिभाशाली कथाकार हैं। चार उपन्यास जिनमें एक शीघ्रप्रकाश्य है तथा कई कथा संग्रह तरुण के छप चुके हैं जो पाठकों के बीच भारी चर्चा के साथ उनके…

Continue Reading

पाण्डेय शशिभूषण शीतांशु हिंदी आलोचना का एक प्रतिष्ठित नाम है। 1941 में जन्मे शीतांशु वादमुक्त आलोचना के पर्याय हैं । आपने डा. रामविलास शर्मा या डा. नामवर के नक्शेक़दम पर न चलकर अपनी विवेकदृष्टि से जीवन के साथ चलकर आलोचना…

Continue Reading