मीर : आपबीती से जगबीती तक -लीलाधर मंडलोई गयी वो बात कि हो, गुफ़्तगू तो क्यूं कर…
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कविताएं 1.।। भागलपुरी चादर ।। मूलतः किसान थे रामसुफल, कहते कभी गांधी जी को देखा था किसी…
काठ के पुतले -प्रज्ञा ललिता के लिए रोज़ का देखा-भाला रास्ता अब पहले जैसा कहां रह गया…
