रचना समय में लीलाधर मण्डलोई की कविताएं प्रस्तुत हैं। इन कविताओं में विस्थापन का दर्द गाढ़ा है। इन कविताओं से गुज़रते हुए महसूस होता है कि ये उन लोगों की कविताएं हैं जो अपनी जड़ों से हकाले जा रहे हैं…
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