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राख में दबी चिंगारी -अरविंद कुमार सिंह विनय की मौत से मुझे गहरा सदमा लगा। उसकी जेब से मिले कागज़ के एक पुर्जे पर एक टिप्पणी है, जैसे छुप-छुपाकर जल्दबाजीमें लिखी गई हो, ‘ समय बहुत खराब है। आंखें बंद…

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  टूटी परिधि का वृत्त -उपासना  रात आसमान को आगोश में कसती जा रही थी। अमरूद की डाल पर झूला लटक गया था। झूला चर्रऽऽ…चर्रऽऽ… हवा में झूल रहा था। आँगन में एक खूब बड़ा मन्दिर आ गया था। मन्दिर…

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ब्रज श्रीवास्तव की कविताएं 1 माँ की ढोलक ढोलक जब बजती है तो जरूर पहले वादक के मन में बजती होगी. किसी गीत के संग इस तरह चलती है कि गीत का सहारा हो जाती है और गीत जैसे नृत्य…

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  संजय कुंदन की कविताएं कुछ और कवि कविता के संसार में और भी है कई संसार ऐसे कवि भी होते हैं जो कभी किसी से नहीं कहते वे कवि हैं वे एकांत में कविताएं लिखते और रख देते दराज…

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कविताएं 1.।। भागलपुरी चादर ।। मूलतः किसान थे रामसुफल, कहते कभी गांधी जी को देखा था किसी सभा मे, तभी से विदेशी चीजों का उपयोग करने,व बेचने से बचते रहे सदा,वैसे हमेशा से,वे खरीफ और रबी की फसल कट जाने…

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