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हिन्दी सिनेमा में घोर रूमानियत और विशुद्ध मनोरंजन की फ़िल्मों के बावजूद विचार के स्तर पर कुछ कला फ़िल्में ऐसी भी आई हैं जो फ़िल्म – प्रेमियों के दिलो – दिमाग़ से आज तक नहीं बिसरीं। मुग़ले आज़म और गमन…

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‘गुम ख़ज़ाना’ एक ऐसे कलाप्रेमी संग्रहकर्ता की कहानी है जो अपनी आंखों की ज्योति खो बैठा है ,लेकिन दुर्भाग्य का खेल कहें ,वह अपनी जमापूंजी – कला – कृतियों को भी खो बैठता है और इसका उसे रत्ती भर भी…

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‘ मध्य लय में रक्त सूर्य ‘ लीलाधर मण्डलोई की लम्बी कविता है। राम की शक्ति पूजा , नगई महरा , अंधेरे में, पटकथा , लुकमान अली, मां जानती है की काव्य – परम्परा और कहें तो ‘महाजनी सभ्यता ‘…

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चित्रा सिंह की प्रस्तुत कविताएं प्रेम के विविध शेड्स को अभिव्यक्ति देती हैं। प्रेम में जहां गहरी आसक्ति है,लगाव है , वहीं विछोह है और उसकी पीड़ा। लेकिन पीड़ा को चित्रा सिंह मुक्ति की संज्ञा देती हैं जिसमें वे टूटती…

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मुंशी प्रेमचंद के पुत्र एवं प्रसिद्ध रचनाकार श्रीपत राय ने आंचलिक उपन्यासों, ख़ासकर रेणु के उपन्यासों के बारे में कहा था कि अपने रूप – विधान और दृश्यों में वे हमें इस क़दर घेर लेते हैं कि विषय- वस्तु या…

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