राख में दबी चिंगारी -अरविंद कुमार सिंह विनय की मौत से मुझे गहरा सदमा लगा। उसकी जेब…
कहानी
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टूटी परिधि का वृत्त -उपासना रात आसमान को आगोश में कसती जा रही थी। अमरूद की…
बाबू जी की छतरी -अवधेश प्रीत छतरी मामूली मरम्मत से ठीक हो सकती थी और एहतियात के…
काठ के पुतले -प्रज्ञा ललिता के लिए रोज़ का देखा-भाला रास्ता अब पहले जैसा कहां रह गया…
बाजार में रामधन -कैलाश बनवासी यह बालोद की बुधवारी बाजार है. बालोद इस जिले की एक तहसील…
लफ्फाज -योगेंद्र आहूजा एथेंस का पतन हो रहा है क्योंकि शब्द अपने अर्थ खो रहे हैं ।…
पार्टी के बाद -आनंद बहादुर मैं बैठा हूँ। सामने वह बैठी है। दावत खत्म हो चुकी है…
मारिया ज़किया ज़ुबैरी सभी एक दूसरे से आँखें चुरा रहे थे। अजब-सा माहौल था। हर…
ख़्वाहिशों के पैबन्द… – तेजेन्द्र शर्मा ऐसे हादसे मेरे साथ ही क्यों होते हैं… अच्छी भली…
‘The Romanticism of a dreamer’ Is a long poem by Saumitra. If we think of long poems,…
